Indian Bureaucracy News | LUVAS Scientists excel at Shivamogga National Conference
वेटरनरी कॉलेज, शिवमोग्गा (कर्नाटक) में 26 से 28 नवम्बर तक आयोजित 25वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन में लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), हिसार के वैज्ञानिकों ने अपने उत्कृष्ट अनुसंधान कार्यों से विश्वविद्यालय का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। यह सम्मेलन भारतीय पशु चिकित्सा भैषज्य एवं विष विज्ञान सोसायटी द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें देश–विदेश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया।
सम्मेलन में लुवास की शोधार्थी छात्रा डॉ. सोनू देवी को उनके उत्कृष्ट शोध “प्रोफेनोफॉस द्वारा उत्पन्न जीन विषाक्तता तथा करक्यूमिन द्वारा उसके निवारण का मूल्यांकन” विषय पर वर्ष 2024 का सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार प्रदान किया गया। उन्होंने यह शोधकार्य कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) विनोद कुमार वर्मा के मार्गदर्शन में वर्ष 2023 में उत्कृष्ट वैज्ञानिक निष्पादन क्षमता से पूरा किया था।
इसी सम्मेलन की पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता में लुवास की वैज्ञानिक डॉ. प्रीति बागड़ी ने अपने शोध “साइक्लोफॉस्फामाइड से उत्पन्न विषाक्तता के विरुद्ध बहु-औषधीय संयोजन की जीन-सुरक्षात्मक क्षमता का मूल्यांकन” पर आकर्षक एवं वैज्ञानिक रूप से प्रभावशाली प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति को गुणवत्तापूर्ण एवं नवोन्मेषी अनुसंधान कार्य के लिए सर्वसम्मति से सराहा गया और उन्हें पोस्टर प्रस्तुति में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ।
कुलपति सचिवालय में हुई भेंट के अवसर पर कुलपति प्रो. (डॉ.) विनोद कुमार वर्मा ने दोनों वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि— “ये उपलब्धियाँ लुवास की शोध उत्कृष्टता, वैज्ञानिक सामर्थ्य और समर्पित कार्यसंस्कृति का प्रत्यक्ष प्रतीक हैं। लुवास के वैज्ञानिक देश के पशुधन विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, और राष्ट्रीय मंच पर प्राप्त सम्मान उनके निरंतर परिश्रम तथा उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान की महत्वपूर्ण पहचान है।”
पशु चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मनोज कुमार रोज ने भी अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए कहा कि यह सम्मान लुवास की मजबूत शैक्षणिक एवं अनुसंधान परंपरा को सुदृढ़ करता है और युवा वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
अंत में जनसंपर्क अधिकारी डॉ. नीलेश सिंधु ने बताया कि लुवास के वैज्ञानिकों की ये उपलब्धियाँ न केवल विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को बढ़ाती हैं, बल्कि हरियाणा एवं देशभर के पशुपालकों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने हेतु प्रेरित भी करती हैं।